Vippa poola – Song from Sri Ramulayya – Tribute to Maoists in Telugu states

0. Vippa poolu?
1. Lahar jwala?
2. Garla Rail?
3. Rupayi konda?
4. Boddapadu, Potugadda, Garudabhadra villages – Srikakulam peasant uprising- 1960s
http://www.cpiml.net/liberation/2009/02/central-committee-meeting-boddapadu
5. Upper Aviri area- 1969 – Srikakulam
6. Udar singi konda?
7. Jagitial Jaitrayatra-1987-Karimnagar
https://telanganatoday.com/karimnagar-played-vital-role-in-50-years-of-maoist-movement
8. Indravelli Massacre – Adilabad – April 20, 1981 when the police opened fire on huge congregation of tribals
http://www.adivasiresurgence.com/indravelli-massacre-tale-another-jaliawala-baag/
9. Dandakaranya, Bastar in Chhattisgarh
10. Subbarao Panigrahi – Celebrated guerrill poet from Srikakulam

The Che Guevaras of Telugu Society


11. Vempatapu Satyanarayana and Adibatla Kailasam, leaders of the Srikakulam uprising, are killed in police encounter on July 10, 1970. They were school teachers as well

Shayari

https://blog.aaobihar.com/best-poems-of-zakir-khan-from-jashn-e-rekhta-celebrating-urdu/

Usse Acha Nahi Lagta (Lyrics)

जिस  गुलदान  को  तुम  आज   अपना  केहते  हो , उसका फूल  एक  दिन  हमारा  भी  था ,
वो  जो  अब  तुम  उसके  मुक्तार  हो  तो   सून  लो ,
उसे अच्छा  नही लगता ,

मेरी  जान  के  हक़दार  हो  तो  सुन  लो ,
उसे  अच्छा  नहीं  लगता !

वो   जो  अब  तुम  उसके  मुख्तार  हो  तो  सुन  लो ,
उसे  अच्छा नहीं  लगता ,

मेरी  जान  के  हक़दार  हो  तो  सुन  लो ,
उसे  अच्छा  नहीं  लगता ,
की  वो  जो  ज़ुल्फ़  बिखेरे  तो  बिख़िरी  ना  समझना ,
अगर  माथे  पे  आ  जाए  तोह  बेफिक्रि  ना  समझना ,
दरअसल  उसे  ऐसे  ही पसंद  है ,
उसकी  आज़ादी , उसकी  खुली  ज़ुल्फ़ों  में  बंद  है !

जानते  हो ,
जानते  हो  वो  अगर  हज़ार  बार  जुल्फें  ना  सवारे  तोह  उसका   गुज़ारा  नहीं  होता ,
वैसे  दिल  बोहोत  साफ़  है  उसका  इन्  हरकतों  में  कोई  इशारा  नहीं  होता .
खुदा  के  वास्ते , खुदा  के  वास्ते  उसे  कभी  रोक  ना  देना ,
उसकी  आज़ादी  से  उसी  कभी  टोक  ना  देना ,
अब  मैं  नहीं   तुम  उसके  दिलदार  हो  तोह  सुन  लो ,
उसे   अच्छा  नहीं  लगता.!!

Main Shunya Pe Sawar Hu (Lyrics)

मैं शून्य पे सवार हूँ
बेअदब सा मैं खुमार हूँ
अब मुश्किलों से क्या डरूं
मैं खुद कहर हज़ार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ

उंच-नीच से परे
मजाल आँख में भरे
मैं लड़ रहा हूँ रात से
मशाल हाथ में लिए
न सूर्य मेरे साथ है
तो क्या नयी ये बात है
वो शाम होता ढल गया
वो रात से था डर गया
मैं जुगनुओं का यार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ

भावनाएं मर चुकीं
संवेदनाएं खत्म हैं
अब दर्द से क्या डरूं
ज़िन्दगी ही ज़ख्म है
मैं बीच रह की मात हूँ
बेजान-स्याह रात हूँ
मैं काली का श्रृंगार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ

हूँ राम का सा तेज मैं
लंकापति सा ज्ञान हूँ
किस की करूं आराधना
सब से जो मैं महान हूँ
ब्रह्माण्ड का मैं सार हूँ
मैं जल-प्रवाह निहार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ

1.Mirza Ghalib

https://www.rekhta.org/ghazals/dil-hii-to-hai-na-sang-o-khisht-dard-se-bhar-na-aae-kyuun-mirza-ghalib-ghazals?lang=hi

दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँ

रोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँ

‘ग़ालिब’-ए-ख़स्ता के बग़ैर कौन से काम बंद हैं

रोइए ज़ार ज़ार क्या कीजिए हाए हाए क्यूँ

2.Ahmad Faraz

https://www.rekhta.org/couplets/us-ne-sukuut-e-shab-men-bhii-apnaa-payaam-rakh-diyaa-ahmad-faraz-ghazals?lang=hi

उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया

हिज्र की रात बाम पर माह-ए-तमाम रख दिया

और ‘फ़राज़’ चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझे

माओं ने तेरे नाम पर बच्चों का नाम रख दिया

 

3. Jaun Elia

a.

तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो
जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो

तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की ख़ुशबू
और इतने ही बेमुरव्वत हो

तुम हो पहलू में पर क़रार नहीं
यानी ऐसा है जैसे फुरक़त हो

है मेरी आरज़ू के मेरे सिवा
तुम्हें सब शायरों से वहशत हो

किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ
तुम मेरी ज़िन्दगी की आदत हो

किसलिए देखते हो आईना
तुम तो ख़ुद से भी ख़ूबसूरत हो

दास्ताँ ख़त्म होने वाली है
तुम मेरी आख़िरी मुहब्बत हो

b. https://www.rekhta.org/ghazals/iizaa-dahii-kii-daad-jo-paataa-rahaa-huun-main-jaun- liya-ghazals?lang=hi

 ईज़ा-दही की दाद जो पाता रहा हूँ मैं

हर नाज़-आफ़रीं को सताता रहा हूँ मैं

 

शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई

लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं

 

कल दोपहर अजीब सी इक बे-दिली रही

बस तीलियाँ जला के बुझाता रहा हूँ मैं

c. https://www.rekhta.org/ghazals/kaam-kii-baat-main-ne-kii-hii-nahiin-jaun-eliya-ghazals?lang=hi

काम की बात मैं ने की ही नहीं

ये मिरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं

हाए वो शौक़ जो नहीं था कभी

हाए वो ज़िंदगी जो थी ही नहीं

4. Rahat Indauri

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है

सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है

 

5. Wasim Barelvi

https://www.rekhta.org/ghazals/mohabbat-naa-samajh-hotii-hai-samjhaanaa-zaruurii-hai-waseem-barelvi-ghazals?lang=hi

मोहब्बत ना-समझ होती है समझाना ज़रूरी है

जो दिल में है उसे आँखों से कहलाना ज़रूरी है

उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है

जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है

 

मिरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो

कि इस के बा’द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

https://www.rekhta.org/ghazals/main-is-umiid-pe-duubaa-ki-tuu-bachaa-legaa-waseem-barelvi-ghazals?lang=hi

मैं इस उमीद पे डूबा कि तू बचा लेगा

अब इस के बा’द मिरा इम्तिहान क्या लेगा

ये एक मेला है वा’दा किसी से क्या लेगा

ढलेगा दिन तो हर इक अपना रास्ता लेगा

मैं बुझ गया तो हमेशा को बुझ ही जाऊँगा

कोई चराग़ नहीं हूँ कि फिर जला लेगा

कलेजा चाहिए दुश्मन से दुश्मनी के लिए

जो बे-अमल है वो बदला किसी से क्या लेगा

मैं उस का हो नहीं सकता बता न देना उसे

लकीरें हाथ की अपनी वो सब जला लेगा

हज़ार तोड़ के आ जाऊँ उस से रिश्ता ‘वसीम’

मैं जानता हूँ वो जब चाहेगा बुला लेगा